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Friday, April 4, 2025

TU HAI TO DIL - LYRICS

Kᴏɪ ɴᴀʜɪ ᴍᴇʀᴀ, ᴢᴀʀᴏᴏʀᴀᴛ ᴛᴇʀɪ
Lᴀᴀɢᴇ ɴᴀ ᴊɪʏᴀ, ᴅᴇᴋʜᴜ ɴᴀ ᴊᴏ sᴏᴏʀᴀᴛ ᴛᴇʀɪ

Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴅɪʟ ᴅʜᴀᴅᴀᴋᴛᴀ ʜᴀɪ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ sᴀᴀɴs ᴀᴀᴛɪ ʜᴀɪ
Tᴜ ɴᴀ ᴛᴏʜ ɢʜᴀʀ ɢʜᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴅᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ
Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ɢʜᴀᴍ ɴᴀ ᴀᴀᴛᴇ ʜᴀɪɴ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴍᴜsᴋᴜʀᴀᴛᴇ ʜᴀɪɴ
Kᴇ ᴛᴇʀᴇ ʙɪɴ sᴏ ɴᴀʜɪ sᴀᴋᴛᴇ, ᴋɪsɪ ᴋᴇ ʜᴏ ɴᴀʜɪ sᴀᴋᴛᴇ
Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ…

Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ…

Tᴜᴊʜsᴇ ᴍᴇʀᴀ ᴊᴇᴇɴᴀ-ᴍᴀʀɴᴀ, ᴊᴀᴀɴ ᴛᴇʀᴇ ʜᴀᴀᴛʜ ᴍᴇɪɴ
100 ᴊᴀɴᴀᴍ ʙʜɪ ᴋᴀᴍ ᴋʏᴜɴ ʟᴀᴀɢᴇɪɴ, ʟᴀᴀɢᴇɪɴ ᴛᴇʀᴇ sᴀᴀᴛʜ ᴍᴇɪɴ?
Mᴀɪɴ ᴍᴜsᴀғɪʀ, ᴛᴜ ᴍᴜsᴀғɪʀ ɪs ᴍᴏʜᴀʙʙᴀᴛ ᴋᴇ sᴀғᴀʀ ᴍᴇɪɴ
Dᴏ ᴀᴋᴇʟᴇ ʀᴏʏᴇɪɴ ᴍɪʟ ᴋᴇ, ᴍɪʟ ᴋᴇ ᴅᴏɴᴏ ʀᴀʙ ᴋᴇ ɢʜᴀʀ ᴍᴇɪɴ
Sᴀᴀᴛʜ ᴛᴇʀᴇ ɴᴀ sᴀғᴀʀ, ᴡᴏ sᴀғᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ

Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴅɪʟ ᴅʜᴀᴅᴀᴋᴛᴀ ʜᴀɪ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ sᴀᴀɴs ᴀᴀᴛɪ ʜᴀɪ
Tᴜ ɴᴀ ᴛᴏʜ ɢʜᴀʀ ɢʜᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴅᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ
Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ɢʜᴀᴍ ɴᴀ ᴀᴀᴛᴇ ʜᴀɪɴ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴍᴜsᴋᴜʀᴀᴛᴇ ʜᴀɪɴ
Kᴇ ᴛᴇʀᴇ ʙɪɴ sᴏ ɴᴀʜɪ sᴀᴋᴛᴇ, ᴋɪsɪ ᴋᴇ ʜᴏ ɴᴀʜɪ sᴀᴋᴛᴇ
Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ…

Hᴀɪ ᴀɢᴀʀ ʏᴇ ᴋʜᴡᴀᴀʙ ᴛᴏʜ ᴘʜɪʀ ɴᴇᴇɴᴅ ɴᴀ ᴛᴏᴏᴛᴇ ᴋᴀʙʜɪ
Sᴀᴀɴs ᴄʜʜᴏᴏᴛᴇ ʜᴀᴀᴛʜ sᴇ, ᴘᴀʀ ʜᴀᴀᴛʜ ɴᴀ ᴄʜʜᴏᴏᴛᴇ ᴋᴀʙʜɪ
Mᴀɪɴ ɴᴀᴀsᴀᴍᴀᴊʜ-ɴᴀᴅᴀᴀɴ ʜᴏᴏɴ, ᴀᴀ ᴋᴇ ᴍᴜᴊʜᴋᴏ ᴛʜᴀᴀᴍ ʟᴇ
Lᴀᴀɢᴇ ᴍᴜᴊʜᴋᴏ ʀᴀʙ ʙᴜʟᴀᴀʏᴇ, ᴊᴀʙ ᴛᴜ ᴍᴇʀᴀ ɴᴀᴀᴍ ʟᴇ
Tᴜ sᴀᴍᴀɴᴅᴀʀ ɢᴇʜʀᴀ ʜᴀɪ, sᴀᴀɢᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ

Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴅɪʟ ᴅʜᴀᴅᴀᴋᴛᴀ ʜᴀɪ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ sᴀᴀɴs ᴀᴀᴛɪ ʜᴀɪ
Tᴜ ɴᴀ ᴛᴏʜ ɢʜᴀʀ ɢʜᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴅᴀʀ ɴᴀʜɪ ʟᴀɢᴛᴀ
Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ɢʜᴀᴍ ɴᴀ ᴀᴀᴛᴇ ʜᴀɪɴ, ᴛᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ ᴍᴜsᴋᴜʀᴀᴛᴇ ʜᴀɪɴ
Kᴇ ᴛᴇʀᴇ ʙɪɴ sᴏ ɴᴀʜɪ sᴀᴋᴛᴇ, ᴋɪsɪ ᴋᴇ ʜᴏ ɴᴀʜɪ sᴀᴋᴛᴇ
Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ…

Tᴜ ʜᴀɪ ᴛᴏʜ…

Sunday, January 5, 2025

Aakarsh - Sulat Prahar

 आकर्ष या सुलट प्रहार:

Apkarsh or Ulat Prahar

 अपकर्ष या उलट प्रहार :

Bol in Sitar

बोल (सितार वादन में )

सितार वादन मिज़राब द्वारा होता है. अतएव मिजराब प्रहार से उत्पन्न होने वाली विभिन्न ध्वनियों को बोल कहते हैं. मुख्य बोल दो होते हैं - 'दा ' और 'रा '. दा और  रा को दुगुन ले में क्रम से दारा बजाते हैं. तो वह दिर कहलाता है. प्रायः दा , रा और दिर इन्हीं तीन बोलों पर सितार का सम्पूर्ण बाज निर्भर होता है।  इन्हीं तीन बोलों से अन्य अनेक बोल बना लिए जाते हैं जैसे : दार, द्रा, द्रार्दा, दिर दिर, दार दार ददार, दरार आदि। 

Wednesday, April 29, 2020

राग सुर मल्हार का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: KAFI
आरोह: सारेमपनिसां
अवरोह: सांनि॒प मपनि॒धप मरेऩिसा
पकड़: सारेप मनि॒मप नि॒धपम रेसा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-SHADAV
समय: दिन का द्वितीय प्रहर
विशेष: न्यास-सा म प। यह मल्हार का एक प्रकार है। आरोह में नि और अवरोह में नि॒ का प्रयोग होता है। सारंग से बचने केलिये ध का प्रयोग। सदृश-वृन्दावनी सारंग, सोरठ, सामंत।

राग दुर्गा का परिचय

वादी: 
संवादी: रे
थाट: BILAWAL
आरोह: सारेमपधसां
अवरोह: सांधपमरेसा
पकड़: मपध म रेपम रेधसा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-AUDAV
समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर
विशेष: कर्नाटिक संगीत में यह शुद्धसावेरी नाम से प्रचलित है। वर्जित-ग नि। कुछ लोग vadi-M samvadi-S मानते हैं। इसमें धम रेप रेध की संगति विशेष है।

राग शुद्ध सारंग का परिचय

वादी: रे
संवादी: 
थाट: KALYAN
आरोह: निसारेम॓प धम॓पनिसां
अवरोह: सांनिधपम॓प मरेसा
पकड़: रेम॓प म-रे साऩिध़सा ऩिरेसा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SHADAV-SHADAV
समय: दिन का द्वितीय प्रहर
विशेष: न्यास - रे प नि यह सारंग का प्रकार है। इसमें अवरोह में दोनो मध्यम लगते हैं। स्वर-विस्तार मन्द्र और मध्य में होता है।

राग चन्द्रकौंस का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: BHAIRAVI
आरोह: साग॒मध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒मग॒मग॒सा
पकड़: ग॒म ग॒सानिसा
रागांग: पूर्वांग
जाति: AUDAV-AUDAV
समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर
विशेष: न्यास- ग॒ म नि। वर्जित-आरोह में रे प। मालकोश में नि शुद्ध लगाने से चन्द्रकोश होता है। इससे बचने के लिये शुद्ध नि का बारंबार प्रयोग होता है। तीनो सप्तक में विस्तार किया जाता है।

राग भटियार का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: MARWA
आरोह: सानिधनिपम पग म॓धसां
अवरोह: सांध धप धनिपम पग म॓गरेसा
पकड़: धपम पग रे॒सा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: रात्रि का तृतीय प्रहर
विशेष: न्यास-सा म प। अल्पत्व-म॓। यह मांड( धमपग) एवं भंखार (पगरे॒सा) का मिश्रण है। दोनो से बचाव के लिये साम,पध का प्रयोग। चलन वक्र। पगरे॒सा से इस राग का स्वरूप व्यक्त होता है।

राग जैतश्री का परिचय

वादी: 
संवादी: नि
थाट: PURVI
आरोह: सागम॓पनिसां
अवरोह: सानिध॒पम॓गम॓गरे॒सा
पकड़: पध॒प म॓गम॓गरे॒सा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-SAMPURN
समय: रात्रि का प्रथम प्रहर
विशेष: न्यास-ग प वर्जित - आरोह में ऋषभ धैवत पूर्वांग में जैत और उत्तरांग में श्री राग व्यक्त होता है।

Monday, April 27, 2020

राग बिहाग का परिचय

वादी: 
संवादी: नि
थाट: BILAWAL
आरोह: ऩिसागमपनिसां
अवरोह: सांनिधप म॓पगमग रेसा
पकड़: पम॓गमग रेसा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-SAMPURN
समय: रात्रि का प्रथम प्रहर
विशेष: सदृश- यमन कल्याण। तीनो सप्तक में चलन। विवादी-म॓; वर्जित- आरोह में रे ध;

Sunday, April 26, 2020

राग कलिंगड़ा का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: BHAIRAV
आरोह: सारे॒गम पध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒प मगरे॒सा
पकड़: ध॒प गमग ऩि सारे॒ग म
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: रात्रि का तृतीय प्रहर
विशेष: ऋषभ एवं धैवत पर कम आन्दोलन। न्यास- सा ग प।

Friday, April 24, 2020

कंपन की परिभाषा

द्रुतार्धमान वेगेन कम्पितं गमकं विदुः। 
अर्थात द्रुतलय की आधी गति से कम्पन होने से कम्पित स्वर माना जाता है जिसे गामक भी कहते हैं।

स्वरों को हिलाने से कम्पन होता है।  सितार में जिस स्वर का कम्पन करना हो, उस स्वर के परदे पर बाएं हाथ की अंगुली (मध्यमा या तर्जनी) से तार को दबा कर दाहिने हाथ की तर्जनी से तर को मिजराब से ठोंक कर फिर हलके-हलके बाएं हाथ की अंगुली को हिलाने से जो स्वर उत्पन्न होता है, उसे कम्पन कहते हैं।  यह एक प्रकार का Gamak गमक है।

श्रुति की परिभाषा

नित्यम् गितोपयोगित्वंभिज्ञेयत्वमप्युत। 
लक्ष्यविद्भिः समादिष्टं पर्याप्तं श्रुतिलक्ष्नम्।।  

जो सदा संगितोपयोगी तथा स्पष्ट पहचानने योग्य हो उसको हिन् गुणीजन श्रुति कहते हैं।  संगीत शास्त्रकारों ने संगीतोपयोगी नाद से अपने उपयोग के लिए निम्नलिखित बाइस श्रुतियों का चुनाव किया है:-

  1. तीव्रा
  2. कुमुद्वती 
  3. मंदा 
  4. छंदोवती 
  5. दयावती 
  6. रंजनी 
  7. रक्तिका 
  8. रौद्री 
  9. क्रोधी 
  10. वज्रिका 
  11. प्रसारिणी 
  12. प्रीति 
  13. माजनी 
  14. क्षिति 
  15. रक्ता 
  16. संदीपनी 
  17. आलापिनी 
  18. मदन्ती 
  19. रोहिणी 
  20. रम्या 
  21. उग्रा 
  22. क्षोभिणी 

राग केदार का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: KALYAN
आरोह: साम मप धप निध सां
अवरोह: सां निधप म॓पधपम रेसा
पकड़: साम मप धपम रेसा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-SHADAV
समय: रात्रि का प्रथम प्रहर
विशेष: कभी-कभी दोनो मध्यम का प्रयोग मींड द्वारा किया जाना अच्छा लगता है।

राग तिलक कामोद का परिचय

वादी: सा
संवादी: 
थाट: KHAMAJ
आरोह: सारेगसा रेमपधमपसां
अवरोह: सांपधमग सारेग साऩि
पकड़: रेपमग सारेग साऩि
रागांग: पूर्वांग
जाति: SHADAV-SAMPURN
समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर
विशेष: सदृश-देश, सोरठ। मध्य सप्तक के नि के बिना भी इस राग को दिखाया जा सकता है । अनुवादी होते हुये भी नि॒ का प्रयोग कभी-कभी वक्र रूप में हीं होता है।

Thursday, April 23, 2020

राग बागेश्री का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: KAFI
आरोह: साऩि॒ध़ऩि॒सा मग॒ मधनि॒सां
अवरोह: सांनि॒ध मग॒ मग॒मरेसा
पकड़: ऩि॒ध़सा मधनि॒ध मग॒रेसा
रागांग: पूर्वांग
जाति: AUDAV-SAMPURN
समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर
विशेष: न्यास-सा ग॒ म ध। आरोह में पंचम का अल्प प्रयोग होता है। 

राग पीलू का परिचय

वादी: ग॒
संवादी: नि
थाट: KAFI
आरोह: ऩिसागमपनि
अवरोह: सांनि॒धपग॒ रेसा
पकड़: ऩिसाग॒ ऩिसा प़ध़॒ऩिसा
रागांग: पूर्वांग
जाति: AUDAV-SAMPURN
समय: दिन का तृतीय प्रहर
विशेष: सप्तक के बारहो स्वरों का प्रयोग होता है। उभय ऋषभ गन्धार निषाद का उपयोग। 

राग मालकोश का परिचय

वादी: 
संवादी: सा
थाट: BHAIRAVI
आरोह: साग॒मध॒नि॒सां
अवरोह: सांनि॒ध॒म ग॒मग॒सा
पकड़: ध़॒ऩि॒साम ग॒मग॒सा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-AUDAV
समय: रात्रि का तृतीय प्रहर
विशेष: वर्ज्य-रे प। न्यास-सा, ग॒, म। तीनों सप्तक में चलन।

Wednesday, April 22, 2020

राग नारायणी का परिचय

वादी: रे
संवादी: 
थाट: KHAMAJ
आरोह: सारेमपधसां
अवरोह: सांनि॒धपमरेसा
पकड़: नि॒धप मपधप मरेमरेसा
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-SHADAV
समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर
विशेष: न्यास - सा रे प। वर्जित - ग, आरोह में निषाद भी वर्जित। यह दुर्गा और सारंग के मिश्रण से बना है। दुर्गा से बचाव - अवरोह में नि॒ एवं नि॒धप मप मरे का प्रयोग। सारंग से बचने - ध का प्रयोग।