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Saturday, April 18, 2020
राग गौड़ सारंग का परिचय
राग गौड़ सारंग का परिचय
वादी: ग
संवादी: ध
थाट: KALYAN
आरोह: साऩि रेसा गरे मग पम॓ धप निधसां
अवरोह: सांनिधप धम॓प गमरेसा
पकड़: गरेमगपम॓धपमग सागरेमग परेसा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: दिन का तृतीय प्रहर
विशेष: इस राग का चलन वक्र है। आरोह में सातों स्वरों का प्रयोग वक्र रूप से हीं होता है।
Friday, April 17, 2020
राग शुद्ध कल्याण का परिचय
राग शुद्ध कल्याण का परिचय
वादी: ग
संवादी: ध
थाट: KALYAN
आरोह: सारेगपधसां
अवरोह: सांनिधपम॓गरेसा
पकड़: सारेगपरे गरेगसा
रागांग: पूर्वांग
जाति: AUDAV-SAMPURN
समय: रात्रि का प्रथम प्रहर
विशेष: आरोह में माध्यम और निषाद वर्जित होता है। इसे मन्द्र एवं मध्य स्वर से गाया बजाया जाता है। तीव्र मध्यम का प्रयोग पंचम से गंधार में आते समय मींड़ के साथ लिया जाता है।
राग कामोद का परिचय
राग कामोद का परिचय
वादी: प
संवादी: रे
थाट: KALYAN
आरोह: सारेप म॓पधप निधसां
अवरोह: सांनिधप म॓पधप गमपगमरेसा
पकड़: मरेप गमधप
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: रात्रि का प्रथम प्रहर
विशेष: तीव्र मध्यम एवं कोमल निषाद का प्रयोग वक्र रूप से अवरोह में होता है। जैसे म॓पधनि॒धपम॓पगमपगमरेसा
Thursday, April 16, 2020
राग तोड़ी का परिचय
राग तोड़ी का परिचय
वादी: ध़॒
संवादी: ग॒
थाट: TODI
आरोह: सारे॒ग॒म॓पध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒पम॓ग॒रे॒सा
पकड़: ध़॒ऩिसारे॒ग॒रे॒ग॒रे॒सा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: Day का 卥捯湤 प्रहर
राग पूर्वी का परिचय
वादी: ग
संवादी: ऩि
थाट: PURVI
आरोह: सारे॒गम॓पध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒पम॓गमगरे॒सा
पकड़: ऩिसारे॒गरे॒गम॓गरे॒सा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: Day का 䙯畲瑨 प्रहर
राग पुरिया धनाश्री का परिचय
राग पुरिया धनाश्री का परिचय
वादी: प
संवादी: सा
थाट: PURVI
आरोह: ऩिरे॒गम॓पध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒पम॓गरे॒सा
पकड़: म॓रे॒गप, रे॒ऩिध़॒प़
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: Day का T桩牤 प्रहर
राग पुरिया का परिचय
राग पुरिया का परिचय
वादी: ग
संवादी: ऩि
थाट: MARWA
आरोह: ऩिरे॒सागम॓धनिरें॒सां
अवरोह: सांनिध॒म॓गम॓गरे॒सा
पकड़: ऩिरे॒गऩिरे॒सा, गम॓धगम॓ग, निम॓गरे॒सा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SHADAV-SHADAV
समय: Day का T桩牤 प्रहर
राग परज का परिचय
राग परज का परिचय
वादी: सां
संवादी: प
थाट: PURVI
आरोह: ऩिसागम॓ध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒प, म॓पध॒पगमग, म॓गरे॒सा
पकड़: सांरे॒सांरे॒निध॒नि, ध॒पगमग, म॓पध॒पगमग
रागांग: उत्तरांग
जाति: AUDAV-SAMPURN
समय: Night का T桩牤 प्रहर
राग मारवा का परिचय
राग मारवा का परिचय
वादी: रे॒
संवादी: ध
थाट: MARWA
आरोह: सारे॒गम॓धनिधसां
अवरोह: सांनिधम॓गरे॒सा
पकड़: धम॓गरे॒गम॓गरे॒सा
रागांग: पूर्वांग
जाति: SHADAV-SHADAV
समय: Day का T桩牤 प्रहर
राग ललित का परिचय
राग ललित का परिचय
वादी: म
संवादी: सा
थाट: MARWA
आरोह: ऩिरे॒गमम॓गम॓धसां
अवरोह: रें॒निध, म॓धमम॓ग, मगरे॒सा
पकड़: ऩिरे॒गमम॓ग, धम॓मग
रागांग: उत्तरांग
जाति: SHADAV-SHADAV
समय: Night का T桩牤 प्रहर
राग छायानट का परिचय
राग छायानट का परिचय
वादी: प
संवादी: रे
थाट: KALYAN
आरोह: सारेगमपनिधसां
अवरोह: सांनिधपम॓पधपमगरेसा
पकड़: प़प़रेसा, सारे, रेग, गम, मप, नि॒धपरे
रागांग: पूर्वांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: Night का F楲獴 प्रहर
राग भैरव का परिचय
वादी: ध़॒
संवादी: सा
थाट: BHAIRAV
आरोह: सारे॒गमपध॒निसां
अवरोह: सांनिध॒पमगरे॒सा
पकड़: रे॒रे॒गमनिध॒पमरे॒सा
रागांग: उत्तरांग
जाति: SAMPURN-SAMPURN
समय: दिन का प्रथम प्रहर
राग बसन्त का परिचय
राग बसन्त का परिचय
वादी: सां
संवादी: प
थाट: PURVI
आरोह: सागम॓ध॒रें॒सां
अवरोह: रें॒निध॒प, म॓ग, म॓गरे॒सा
पकड़: म॓ध॒सां, म॓ध॒रें॒सां
रागांग: उत्तरांग
जाति: SHADAV-SAMPURN
समय: रात्रि का तृतीय प्रहर
Friday, March 27, 2020
राग
राग
योऽयं ध्वनिविशेषस्तु स्वरवर्णविभूषित:।
रंजको जनचित्तानां स राग: कथ्यते बुधै:।।
अर्थात् स्वरों की रचना जिसमें स्वर और वर्ण के युक्त होने के कारण मनुष्य के तित्त की रंजन या उसमें आनन्द विकसित हो, उसे राग कहते हैं।
वक्र-स्वर
वक्र-स्वर
आरोह अथवा अवरोह करने के समय जब किसी स्वर तक जाकर पुनः लौटकर उसके पीछे के स्वर पर आते हैं और फिर उसको छोड़कर आगे बढ़ते हैं तब जिस स्वर से लौटते हैं, उसी स्वर को वक्र स्वर कहते हैं।
जैसे : सा रे ग रे म
यहाँ गांधार वक्र हैं।
आरोह अथवा अवरोह करने के समय जब किसी स्वर तक जाकर पुनः लौटकर उसके पीछे के स्वर पर आते हैं और फिर उसको छोड़कर आगे बढ़ते हैं तब जिस स्वर से लौटते हैं, उसी स्वर को वक्र स्वर कहते हैं।
जैसे : सा रे ग रे म
यहाँ गांधार वक्र हैं।
पकड़-स्वर
पकड़-स्वर
ऐसे स्वर-समुदाय जिससे किसी राग को पहचाना जाता है, उसे पकड़ कहते हैं, जैसे : "ग रे नि रे सा" कहने से यमन राग का बोध होता है।
ऐसे स्वर-समुदाय जिससे किसी राग को पहचाना जाता है, उसे पकड़ कहते हैं, जैसे : "ग रे नि रे सा" कहने से यमन राग का बोध होता है।
तान
तान
गाने या बजाने में जो सरगम नियमित रूप से ताल में गाये-बजाये जाते हैं, उन्हीं तानों और सरगमों को सितार पर दिरदादिर दारा आदि बोल के सहारे बजाने से तोड़े बनते हैं। तान दो तरह के होते हैं- शुद्ध तान और कूट तान।
येन विस्तार्यते रागः स तानः कथ्यते बुधैः ।
शुद्धकूटविभेदेन द्विविधास्ते समीरिताः ।।
गाने या बजाने में जो सरगम नियमित रूप से ताल में गाये-बजाये जाते हैं, उन्हीं तानों और सरगमों को सितार पर दिरदादिर दारा आदि बोल के सहारे बजाने से तोड़े बनते हैं। तान दो तरह के होते हैं- शुद्ध तान और कूट तान।
झाला
झाला
सितार में चिकारी के तार पर कनिष्टिका या तर्जनी "रा रा" बजने को झाला कहते हैं। इसके कुछ अलग बोल हैं। यह ठीक भ्रमर के गुंजन के सामान मीठा और अच्छा मालूम होता है और नृत्य का आनंद मिलता है।
सितार में चिकारी के तार पर कनिष्टिका या तर्जनी "रा रा" बजने को झाला कहते हैं। इसके कुछ अलग बोल हैं। यह ठीक भ्रमर के गुंजन के सामान मीठा और अच्छा मालूम होता है और नृत्य का आनंद मिलता है।
गत
गत
बोलो की बंदिश जो स्वर और ताल में बंधी हो, उसे गत कहते हैं। इन बोलों के कुछ भी मायने नहीं होते परन्तु हस्त चालन द्वारा निर्देशित स्वर और ताल के मिश्रण को सुनने में आनंद आता है।
सितार पर स्वरों के सहारे और ताल में बंधी हुई दा दिर दा रा, दिरदादिरदारा आदि बोलों की बंदिश जो राग और ताल पर बंधी होती है, उसे गत कहते हैं।
बोलो की बंदिश जो स्वर और ताल में बंधी हो, उसे गत कहते हैं। इन बोलों के कुछ भी मायने नहीं होते परन्तु हस्त चालन द्वारा निर्देशित स्वर और ताल के मिश्रण को सुनने में आनंद आता है।
सितार पर स्वरों के सहारे और ताल में बंधी हुई दा दिर दा रा, दिरदादिरदारा आदि बोलों की बंदिश जो राग और ताल पर बंधी होती है, उसे गत कहते हैं।
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