Indian Classical Music
Syllabus and content for Indian Classical Music
Links to visit
(Move to ...)
Home
जीवनी
परिभाषायें
राग परिचय
भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्र
अध्ययन सामग्री
▼
Saturday, December 28, 2019
तानसेन - जीवनी
›
तानसेन का असली नाम तन्ना मिश्र था और पिता का नाम मकरंद पांडे। कुछ लोग पांडे जी को मिश्र भी कहते थे। तानसेन की जन्मतिथि के विषय में अनेक मत...
Tuesday, March 19, 2019
Class IX exam 2018-19
›
3 comments:
Friday, February 22, 2019
Mera jeevan tere hawale : Mr. Ashok Kumar
›
Bhajan - Mera jeevan tere hawale by Mr. Ashok Kumar, PGT (Music), M. N. D. +2 High School Raipur Ujiarpur, Samastipur.
1 comment:
Tere naam Ka deewana : Mr. Ashok Kumar
›
Gajal - Tere naam Ka deewana by Mr. Ashok Kumar, PGT (Music), M. N. D. +2 High School Raipur Ujiarpur, Samastipur.
Thursday, February 14, 2019
सप्तक : परिभाषा
›
कण : परिभाषा
›
किसी दूसरे को स्पर्श कर के जब कोई स्वर बजाया जाता है तब उस किये हुए स्वर को कण कहा जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं: १. निचे के स्वर...
Monday, February 11, 2019
Sangeet Praveen Syllabus
›
Sunday, February 10, 2019
Now this site is on your finger tip
›
Just click here to and install the Android app and enjoy this site on your Android phone.
राग अल्हैया बिलावल का परिचय
›
थाट - बिलावल जाति - षाडव - सम्पूर्ण वादी - धैवत संवादी - गंधार वर्ज्य स्वर - आरोह में म विकृत स्वर...
राग भीमपलासी का परिचय
›
राग भीमपलासी का परिचय जब काफी के मेल में, आरोहन रेध त्याग | तृतीय प्रहार दिन ग नि कोमल, मानत म सा संवाद || थाट - काफी ...
2 comments:
राग वृन्दावनी सारंग का परिचय
›
राग वृन्दावनी सारंग का परिचय वर्ज्य करे धैवत गंधार, गावत काफी अंग | दो निषाद रे प संवाद, है वृन्दावनी सारंग || थाट - काफी ...
5 comments:
थाट : परिभाषा
›
थाट स्वरों की एक विशेष रचना होती है जिसमे से राग की बुनियाद बनती है. थाट के सम्बन्ध में निम्नलिखित बाते ध्यान रखी जाति है - १. थाट में ह...
1 comment:
Saturday, February 9, 2019
वर्ण : परिभाषा
›
गाने की प्रत्यक्ष क्रिया या स्वरों की विविध चलन को वर्ण कहते हैं. ये चार प्रकार के होते हैं। अभिनव राग मंजरी में कहा गया है, "गान क्रि...
1 comment:
विवादी : परिभाषा
›
जिस स्वर को राग में लगाने से राग का स्वरुप बिगड़ जाये, अर्थात राग में न प्रयोग किए जाने वाले स्वरों को विवादी कहते हैं. इसे राग का शत्रु भी...
अनुवादी : परिभाषा
›
वादी और संवादी को छोड़कर बाद की नियमित स्वरों को अनुवादी कहते हैं. इन्हें राग का सेवक कहते हैं. उदाहरण के लिए भैरवी राग में म-सा के अतिरि...
आभोग : परिभाषा
›
गाने के चौथे पद को आभोग कहते हैं. इसका रूप अंतरे से कुछ भिन्न होता है.
1 comment:
संचारी : परिभाषा
›
गाने के तीसरे पद को संचारी कहते हैं. इस पद से स्थाई के ऊपर वाले भाग का विशेष बोध होता है.
अंतरा : परिभाषा
›
गाने के दुसरे पद को अंतरा कहते हैं. यह पद मध्य-सप्तक से आरम्भ होकर तार-सप्तक के मध्य तक जाता है.
2 comments:
स्थाई : परिभाषा
›
गाने के प्रथम पद को स्थाई कहते हैं. इसमें राग का स्पष्ट रूप प्रकट हो जाता है और तार-सप्तक के स्वरों का उपयोग कम होता है.
गमक : परिभाषा
›
स्वरस्य कम्पो गमक: श्रोतृचित्तसुखावह:। सितार में गमक मिठास उत्पन्न करने के लिए एक उत्तम क्रिया है। मींड , जमजमा, मुर्की एवं गिटकिड़ी आदि सभी ...
1 comment:
‹
›
Home
View web version